आधुनिकरकरण पर जनसंचार के माध्यमों का प्रभाव एक समाज शास्त्रीय अध्ययन

 

डाॅ. प्रीति परमार

प्राचार्य, होप टीचर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट टीकमगढ़ (.प्र.)

 

आज आधुनिकता का मानव जीवन से सीधा संबंध है। समय के बदलते परिवेश के साथ मनुष्य ने अपनी आवश्यकताओं में भी परिवर्तन किया, यही परिवर्तन धीरे-धीरे आधुनिकता का रूप लेने लगी। जहाँ तक भारत मेंआधुनिकता का प्रश्न है, वह गुलामी के समय से ही प्रारंभ हो गया था। जब अंग्रेज इस देश को अपने अधीन कर अपनी पश्चिमी सभ्यता की परतें इस देश के ऊपर जमाने लगे थे। आजादी के बाद देश में तीव्र गति से सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक क्षेत्र में परिवर्तन हुआ। लोगों में जागरूकता बढ़ी, शिक्षा के स्तर में परिवर्तन हुआ। औद्योगीकरण की प्रणालियाॅ विकसित हुई, संचार एवं आवागमन के साधनों में विकास हुआ। आज का युग संचार युग है बिना संचार के सामाजिक जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। यद्यपि संचार का इतिहास उतना ही पुराना है जितना मानव, परन्तु संचार के क्षेत्र में प्रगति कुछ सौ वर्ष पूर्व और क्रांति बीसवीं सदी की ही देन है। प्रस्तुत शोध पत्र में आधुनिकीकरण पर जनसंचार के माध्यमों को परिभाषित करते हुए संचार क्रांति के विविध पक्षों एवं प्रभावों का वर्णन एवं विश्लेषण किया गया है एवं निष्कर्ष निकाला गया है कि संचार क्रांति ने इलेक्ट्राॅनिक मीडिया को विशेष रूप से प्रभावित किया है और इसका प्रभाव विश्वव्यापी है।

 

आधुनिकीकरण, जनसंचार साधन, इलेक्ट्रानिक मीडिया।

 

 

 

प्रस्तावना

मनुष्य का प्रारंभिक चरण आदिम समाज का था, इसलिये उसकी प्रवृत्ति राक्षसी थी। जैसे-जैसे वह सभ्यता की लकीर की ओर बढ़ता गया वैसे-वैसे उसकी विचारधारा और आवश्यकताओं में बदलाव होने लगा। उसकी अपनी अज्ञानता के प्रति जानने की स्वाभाविक वृत्ति ने अनेक नये संदर्भो की खोज की, यही खोज आगे चलकर समाज परिवार समूह समुदाय में विकसित होती रही। सभ्यता की ऊॅचाइयों

 

की तरह बदलते उसके कदम विविध रूपों मेें सवरते गये। वह अपनी मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़ा और उन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये नये समीकरणों को विकसित किया। समय के साथ सिर्फ आवश्यकताओं में ही परिवर्तन नहीं हुआ बल्कि उनकी पूर्ति में भी बदलाव आया और उसी बदलाव ने आधुनिक युग को जन्म दिया। आज विज्ञान के बढ़ते चरण धरती से लेकर आकाश तक की दूरी माप चुके हैं।

 

उसके साथ ही आधुनिकता की परतें भी हिन्दुस्तानी सभ्यता में अपनी जड़े जमा ली। सामूहिक व्यवहार के रूप में आधुनिक जन समूह अथवा सामूहिक घटनाओं के कुछ महत्वपूर्ण पक्षों को स्पष्ट करता है। यह सामान्य से थोड़ा अलग जाने वाला प्रचलन होता है तथा किसी जन समूह द्वारा अपनाये जाने वाला नूतन व्यवहार प्रतिमान होता है।संचार शब्द का शाब्दिक अर्थ किसी बात को आगे बढ़ाना, चलाना या फैलाना है। यह शब्द संस्कृत की मूल धातुचर से निर्मित है जिसका अर्थ है चलना जब कोई शब्द या विचार दूसरों तक पहुॅचता है तो वह संचार कहलाता है। अतः संचार की परिभाषा करते हुय कहा जा सकता है कि यह संदेश या सूचना को दूसरे तक किसी उद्देश्य से पहुॅचाने की कला है।1 इस रूप में समाज मेंसंचार का स्थान अत्यन्त महत्वपूर्ण है यही कारण है कि प्रारम्भ से ही मानवसंचार के विविध साधनों का उपयोग और विकास करता रहा है अभी रूका नहीं, और ही कभी रूकेगा, यह प्रकृति की नियम है कोई नहीं कह सकता कि प्रगति की दिशा कौन सी होगी।

 

मनुष्य राष्ट्र और सामाजिक व्यवस्था का नियामक भी है भोक्ता भी। वह समाज को बदलता भी है। और समाज के साॅचे में खुद ढलता भी है। हमारा मौजूदा युग अथवा भारतीय समाज अपनी प्राचीनतम, समृद्ध धार्मिक, आध्यात्मिक प्राकृतिक परम्पराओं का पोषण करता हुआ साथ ही उससे पोषित होता हुआ आज जिस मुकाम पर खड़ा दिखाई दे रहा है वहाॅ से आधुनिकता की सारी राहें खुलती है। इस कालखण्ड को संक्रमण का युग, सूचना विस्फोट का युग, बाजारवाद का युग मशीनयुग, उपभोक्तावादी युग विज्ञापन का युग महिला सशक्तीकरण युग, जनसंख्या विस्फोट का युग, वैश्वीकरण का युग, एटम युग विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी युग, आदि अनेक संज्ञाओं से संबोधित किया जा रहा है। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् विकासशील भारत, विकसित देशों के साथ कदमताल करने के लिये निरंतर अग्रसर है। पिछले लगभग तीन दशकों में भारतीय समाज बड़ी तेजी से पश्चिमोन्मुख हुआ है। आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से हम पाश्चात्य देशों की तर्ज पर अपना चोला बदलते रहे है।

 

परंपरागत माध्यम (टेªडीशनल मीडिया) माध्यम अत्यन्त प्राचीन रहा है अतः हमारी संस्कृति और दैनिक जीवन का विशिष्ट तथा अपरिहार्य अंग बना गया है इसमें संचार व्यापाक एवं सामूहिक स्तर पर होता है। परम्परागत माध्यम धार्मिक तथा सांस्कृतिक क्षेत्र के लिये अत्यन्त, उपयुक्त समझे जाते है। इनके प्रमुख रूपों में लोक कला, संगीत, लोकगीत, समारोह, मेला, धार्मिक आयोजन, सम्मेलन इत्यादि सम्मिलित हैं।

 

मुद्रित माध्यम (प्रिंट मीडिया) छपे स्वरूप में व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुॅचता है अतः केवल शिक्षित लोग ही इसका लाभ ले सकते हैं। शिक्षित जन समुदाय में इसका महत्व अत्याधिक होता है। इसके अन्तर्गत पुस्तकें, समाचार पत्र-पत्रिकायें, जर्नल, विज्ञापन, पम्पलेट, कैलेण्डर स्टिकर इत्यादि को सम्मिलित किया जाता है।

 

इलेक्ट्राॅनिक माध्यम (इलेक्ट्राॅनिक मीडिया) वर्तमान समय में सर्वाधिक सशक्त माध्यम है क्योंकि इसका लाभ शिक्षित, अशिक्षित सभी लोग से सकते हैं, अतः इसकी पहुॅच विशिष्ट से लेकर सामान्य जन तक एक समान है। इसके अन्तर्गत इलेक्ट्रानिक उपकरणों के माध्यम से संचार संभव होता है।

 

इसके अन्तर्गत रेडियो, टेलीविजन, फिल्म, वीडियो, टेलीफोन, इन्टरनेट, कम्प्यूटर, -मेल, फैक्स इत्यादि साधन आते हैं। प्रसार की दृष्टि से इसका क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है और विश्व व्यापी स्तर का है। अतः यह राष्ट्रो की सीमाओं से परे है।

 

इलेक्ट्रानिक माध्यमों में टेलीविजय नवीन एवं प्रभावी है, इसी कारण से प्रस्तुत अध्ययन को इसी पर केन्द्रित किया गया है।

 

उद्देश्य:-

     जनसंचार साधनों के द्वारा ग्रामीणों के जीवन पर पड़ने वाली वास्तविक स्थिति का पता लगाना।

     आधुनिकीकरण के प्रभाव से ग्रामीण समाज में होने वाले परिवर्तन का पता लगाना।

     जनसंचार साधनों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के उपर होने वाले अपराध हिंसा का पता लगाना।

     घर के बाहर काम करने वाले युवाओं को जनसंचार साधनों के माध्यम से सर्वाधिक हितकारी हो सकने वाले माध्य का पता लगाना।

 

उपकल्पना:-

     जनसंचार के कारण ग्रामीणों युवाओं में शैक्षणिक विकास हुआ है।

     जनसंचार के कारण ग्रामीण महिला एवं पुरूषोें में राजनैतिक क्षेत्र में समानता आई है।

     जनसंचार के फलस्वरूप आजीविका के क्षेत्र में भी परिवर्तन हुआ है।

 

शोध क्षेत्र क्षेत्र का संक्षिप्त विवरण:-

प्रस्तुत शोध पत्र का अध्ययन ग्राम अजगरहा जिला रीवा के संदर्भ में है। यहां के मुख्य निवासियों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। यहां की जनसंख्या लगभग 2250 है। यह रीवा के हुजूर तहसील के अंतर्गत है।

 

शोध प्रविधि -

ज्ञान के क्षेत्र में शोध कार्य अपरिहार्य है। शोध कार्यों द्वारा उन प्रश्नों का उत्तर जानने का प्रयास किया जाता है, जिनका उत्तर उपलब्ध नही है। उन समस्याओं का समाधान करने का प्रयास किया जाता है जिनका समाधान उपलब्ध नही है। वर्तमान युग में शोध या अनुसंधान का अत्याधिक महत्व है, क्योंकि किसी भी क्षेत्र से संबंधित तथ्यों का प्रमाणीकरण, नवीनीकरण, एवं सत्यापन अनुसंधान के द्वारा ही किया जा सकता है।

 

तथ्यों का सारणीयन:-

शोध कार्य में रीवा जिले के अजगरहा ग्राम में जनसंचार साधनों के सामाजिक परिवर्तन से सम्बन्धित वास्तविक एवं विश्वसनीय आँकड़ों को प्राप्त करने के लिये प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों प्रकार के आकड़ों को एकत्र कर पूर्ण किया गया है। प्राथमिक आकड़े स्वयं कार्य स्थल पर जाकर मूल स्रोतो द्वारा एकत्र किये गये हैं। जबकि द्वितीयक आंकड़े परिवार नियोजन से संबंधित विभिन्न प्रकाशित- अप्रकाशित पुस्तकों, शोध पत्र-पत्रिकाओं, समाचार पत्रों, शासकीय प्रतिवेदनों आदि से एकत्र कर प्रयोग किये गये हैं।

 

उपरोक्त सारणी से स्पष्ट है कि रीवा जिले के अमहा ग्राम में 50 परिवारों से साक्षात्कार किया गया जिसमें 60 प्रतिशत लोग कृषि से संबंधित कार्य, 30 प्रतिशत लोग मजदूरी, 10 प्रतिशत लोग अन्य कार्य में लगे हुये है।

 

2. परिवार की प्रकृति -    

 

 

 

 

उपरोक्त सारणी से स्पष्ट है कि रीवा जिले के अजगरहा ग्राम में 50 परिवारों से साक्षात्कार किया गया जिसमें 20 प्रतिशत लोग संयुक्त परिवार में एवं 80 प्रतिशत लोग एकाकी परिवार में रह रहें है।

 

 

 

 

आधुनिकीकरण से प्रभावित क्षेत्र

 

तलिका क्र0 1 में स्पष्ट किया गया है कि ग्रामीण समाज में आधुनिकीकरण का प्रभाव मुख्यतः सभी क्षेत्रों में पड़ा है। चिकित्सा के क्षेत्र में 20 प्रतिशत आधुनिकीकरण का प्रभाव पड़ा है। प्राचीन समय में स्वास्थ्य केन्द्रों में हस्तलिखित पंजीयन पर्ची मिलती थी, दवाओं तथा डाॅ डाक्टरों से सीधा संवाद और बीमारियों का इलाज होता था, लेकिन आधुनिकीकरण के प्रभाव के कारण आॅनलाइन पंजीयन पर्ची, तथा एक्सरे-मशीन, सोनोग्राफी द्वारा बीमारियों का पता लगा लिया जाता है। आधुनिकीकरण के कारण स्वास्थ्य केन्द्रों में पारदर्शिता गई है। शिक्षा के क्षेत्र में भी आधुनिकीकरण का 20 प्रतिशत प्रभाव पड़ा है। जब से आधुनिकीकरण का प्रभाव पड़ा है तब से आॅनलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू की गयी है, जिसके कारण प्रवेश प्रक्रिया आसान, पारदर्शी और सुनिश्चित हो गयी है।

 

व्यापार के क्षेत्र में भी आधुनिकीकरण का भी प्रभाव पड़ा है। व्यापार ज्यादातर आमने-सामने से होते थे परन्तु व्यापार के कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जो आधुनिकीकरण से प्रभावित हुए है जैसे आॅनलाइन शांपिग व्यवस्था किये है।

 

आधुनिकीकरण का प्रभाव मनोरंजन के क्षेत्र में 20 प्रतिशत पड़ा है प्राचीन समय में ग्रामीण समाज में मनोरंजन के साधन के रूप में लोक कथाएं, कजलियां, दादर, फाग, लोकगीत तथा चैपाल नृत्य थे। आधुनिकीकरण के कारण इनका स्थान, मोबाइल गेम, टेलीविजन, संगीत ने ले लिया है। फिल्मों ने ले लिया है।

 

बैंकिंग के क्षेत्र में आधुनिकीकरण का प्रभाव सर्वाधिक 30 प्रतिशत पड़ा है। आधुनिकीकरण के प्रभाव के कारण जहाँ पहले लेन-देने सीधे हाथों द्वारा होकर पासबुक में बनाया जाता था राशि शेश हाथ से लिख दी जाती थी आज कम्प्यूटरों, प्रिन्टरों और गणना मशीन द्वारा लेन-देन किया जाता है। प्रिन्टरों द्वारा पासबुक में जमा और शेष राशि की इंट्री कर दी जाती है। सरकारी कर्मचारियों का वेतन भी जमा होने की जानकारी भी आज मो0 पर मैसेज द्वारा जाती है।

 

इस प्रकार स्पष्ट है कि ग्रामीण समाज में आधुनिकीकरण का प्रभाव पड़ा है। आधुनिकीकरण के कारण ग्रामीण व्यवस्था में और कार्य करने के तरीकों में भी परिवर्तन आया है।

 

3. परिवार में संचार माध्यम (मोबाईल वगैरह) का प्रयोग करने वाले सदस्यों की संख्या -      

 

 

 

उपरोक्त सारणी से स्पष्ट है कि रीवा जिले के अजगरहा ग्राम में 50 परिवारों से साक्षात्कार किया गया जिसमें 36 प्रतिशत परिवार में 3-5 लोग है जो जनसंचार माध्यमों का प्रयोग करते हैं, 40 प्रतिशत परिवार में 5-7 लोग एवं 24 प्रतिशत परिवार जिनमें 7-9 लोग जनसंचार माध्यमों का प्रयोग करते है।

 

तालिका  क्रमांक-4 परिवार में जनसंचार माध्यमों का प्रयोग करने वाले वर्ग

क्र.    विवरण       संख्या प्रतिशत

1.     युवा वर्ग      20     40

2.     वयस्क वर्ग   17     35

3.     वृद्धि वर्ग     13     25

योग   50     100

 

उपर्युक्त तालिका के आधार पर युवा वर्ग में जनसंचार माध्यमों का प्रयोग का स्तर 40 प्रतिशत है तथा वयस्क वर्ग मं 34 प्रतिशत और वृद्ध वर्ग में 25 प्रतिशत यानी सबसे कम वृद्ध वर्ग में जनसंचार माध्यमों का प्रयोग किया जाता है।

 

निष्कर्ष एवं सुझाव

पश्चिमी देशों में जहाॅ सचमुच संचार क्रांति हो चुकी है, यहाॅ बहुत सी चीजें आसान हो गयी हैं। व्यवस्था चुस्त हो गयी है, बहुत से कार्य बटन दबाने मात्र से सम्पन्न हो जाते है, सूचनायें तत्काल उपलब्ध हो जाती हैं पर उसके नकारात्मक पक्ष भी तेजी से उभर कर सामने रहें है।’’

 

संचार क्रांति ने संपूर्ण विश्व में मीडिया साम्राज्यवाद पर बहस छेड़ दी है क्योंकि इसके सूत्र मुख्य रूप से विकसित देशों के हाथ में है। अतः यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि औद्योगिक क्रांति की तह पिछड़े देशों को विशिष्ट प्रकार से नव उपनिवेश बना दिया जाये। यह उपभोक्तावादी समाज के विकास के रूप में होगा। मुक्त बाजार की वकालत उसी का एक हिस्सा है। संपूर्ण मीडिया आज इसी विचार को आगे बढ़ाने और स्थापित करने में जुटा है कि मुक्त बाजार एकी एक अच्छी धारणा है और सभी राष्ट्रों को विकास एवं प्रतिस्पर्धा का अवसर उपलब्ध करायेगा। परन्तु अविकसित, गरीब एवं विकासशील देश कैसे इनका मुकाबला कर पायेगें यह भविष्य के गर्भ में हैं। आशंका यही है कि संचार क्रांति का लाभ बड़े देश ही अधिक ले पायेंगे।

संचार क्रांति का दूसरा पक्ष सांस्कृतिक है विश्व के विकसित देश संचार माध्यमों के द्वारा अपनी संस्कृति को अविकसित एवं पिछड़े देशों पर धोपना चाहते हैं। भारत में इसे पाश्चात्य संस्कृति कि प्रभावों के संदर्भ में देखा जा सकता है। इस प्रक्रिया में इलेक्ट्राॅनिक मीडिया और विशेष रूप से टीवी चैनलों का योगदान अन्य माध्यमों से अधिक एवं प्रभावी है, अतः संचार क्रांति को सांस्कृतिक साम्राज्यवाद के विकास के वाहक के रूप में देखा जा रहा है।

 

इस प्रकार निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि संचार क्रांति ने संचार माध्यमों विशेषतः इलेक्ट्रानिक मीडिया को विशेष रूप से प्रभावित किया है। टेलीविजन इसी का एक भाग है। सेटेलाइट तकनीक के कारण टीवी प्रसारण का स्वरूप विश्वव्यापी हो गया है, अतः उसने राष्ट्रों की सीमाओं को पार करते हुये अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप धारण कर लिया है। भविष्य में यह मीडिया के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करने की स्थिति में रहेगा।

 

संदर्भ ग्रंथ सूची -

1.     निगम, बी.एस., सूचना, संप्रेषण एवं समाज, भोपाल, 1994 पृ.18

2.     राजेन्द्र, जनसंचार (सं. रोधश्याम शर्मा) चंडीगढ़, 1993, पृ. 06

3.     डाॅ. डी.एस. बघेल, भारत में ग्रामीण समाजशास्त्र, कैलाश पुस्तक सदन, भोपाल, पृष्ठ 314-320

4.     प्रो. घनश्याम धर त्रिपाठी श्रीमती आराधना सक्सेना, भारतीय समाज आस्था प्रकाशन जयपुर, पृष्ठ 226

5.     डाॅ. जी0आर0मदन परिवर्तन एवं विकास का समाजशास्त्र विवके प्रकाशन जवाहर नगर दिल्ली 2005, पृ.क्र. 184एनगम, बी.एस.पूर्वोक्त पृ. 21

6.     विस्तृत विवरण के लिये देखे- नायर के एस.., एवं हवाडइ, एस..पर्स- पेटिक्क्स आॅन डेवलमेंट कम्यूनिकेशन, नई दिल्ली, 1993

7.     निगम, बी.एस. पूर्वोक्त, पृ. 39

8.     गुप्त, बृजमोहन, जनसंचार विविध आयाम, दिल्ली, 1992, पृ. 12

9.     जागरण वार्षिक, 1999 पृ. 527

10.    जनसत्ता 4 मई 1997

11.    देव, राहुल, संचार क्रांति एवं पत्रकारिता, (सं. पातंजली प्रेम) नई दिल्ली, 1997 पृ. 57

 

 

Received on 24.04.2019            Modified on 10.05.2019

Accepted on 27.05.2019            © A&V Publications All right reserved

Int. J. Rev. and Res. Social Sci. 2019; 7(2):491-496.